यूपी के 2026 एग्रीगेटर नियमों के तहत रैपिडो को मिला लाइसेंस, अब बाइक, ऑटो, कैब और डिलीवरी सेवाएं होंगी शामिल

इस लाइसेंस के दायरे में राज्य भर में रैपिडो की बाइक, ऑटो, कैब राइड और डिलीवरी सेवाएं शामिल होंगी।
लखनऊ : भारत के सबसे बड़े और किफायती मोबिलिटी प्लेटफॉर्म रैपिडो (रोपेन ट्रांसपोर्टेशन सर्विसेज प्राइवेट लिमिटेड) को उत्तर प्रदेश सरकार के राज्य परिवहन प्राधिकरण से लाइसेंस मिल गया है। यह लाइसेंस उत्तर प्रदेश मोटर व्हीकल (एग्रीगेटर और डिलीवरी सर्विसेज प्रोवाइडर) नियम, 2026 के तहत राज्य में कंपनी की यात्री और डिलीवरी सेवाओं के लिए दिया गया है। यह लाइसेंस पांच साल यानी सितंबर 2031 तक के लिए वैध है।
इस लाइसेंस की मदद से रैपिडो अब उत्तर प्रदेश सरकार द्वारा बनाए गए आधिकारिक नियमों के दायरे में रहते हुए अपनी बाइक, ऑटो-रिक्शा, कैब और डिलीवरी सेवाएं आसानी से चला सकेगा।
उत्तर प्रदेश रैपिडो के लिए एक अहम बाज़ार है। फिलहाल यह प्लेटफॉर्म राज्य के 70 शहरों में मौजूद है और हर दिन लगभग 3 लाख राइड्स पूरी कर रहा है, जिसमें करीब 1 लाख ‘कैप्टन’ (ड्राइवर) का नेटवर्क इसके साथ जुड़ा है। पूरे राज्य में रैपिडो की तेज़ी से बढ़ती पहुँच दिखाती है कि यह लोगों की रोज़मर्रा की यात्रा की ज़रूरतें पूरी करने में कितनी बड़ी भूमिका निभा रहा है। इसका बढ़ता उपयोग इस बात का सबूत है कि बड़े शहरों और उभरते हुए कस्बों में आसान, किफायती और तकनीक पर आधारित परिवहन (मोबिलिटी) की मांग लगातार बढ़ रही है।
यह कदम उत्तर प्रदेश के प्रति रैपिडो की प्रतिबद्धता का एक अहम हिस्सा है। यह भारत के सबसे बड़े और विविधता वाले बाज़ारों में से एक (उत्तर प्रदेश) में तकनीक-आधारित मोबिलिटी और डिलीवरी पार्टनर के रूप में कंपनी की भूमिका को और मज़बूत करता है।
उत्तर प्रदेश मोटर व्हीकल (एग्रीगेटर और डिलीवरी सर्विसेज प्रोवाइडर) नियम, 2026 राज्य में काम करने वाले एग्रीगेटर्स और डिलीवरी सर्विस प्रोवाइडर्स के लिए एक आधिकारिक ढांचा तय करता है। ये नियम एग्रीगेटर्स और डिलीवरी सेवा देने वालों से जुड़े वाहनों पर लागू होते हैं, जिनमें लाइसेंस, नियमों का पालन, सुरक्षा और निगरानी से जुड़ी शर्तें शामिल हैं।
यह लाइसेंस उन हज़ारों कैप्टन, डिलीवरी पार्टनर्स और ग्राहकों का भरोसा और बढ़ाएगा, जो रोज़मर्रा के सफर और डिलीवरी के लिए रैपिडो पर निर्भर हैं। साथ ही, इसके ज़रिए रैपिडो राज्य के नियमों का पालन करते हुए अपनी सेवाओं को और बेहतर बना सकेगा।
इस उपलब्धि पर बात करते हुए रैपिडो के को-फाउंडर पवन गुंटुपल्ली ने कहा, “उत्तर प्रदेश हमारे लिए बाइक टैक्सी और ऑटो से लेकर कैब और डिलीवरी सेवाओं तक रैपिडो की तमाम सुविधाओं को एक साथ लाने का एक बड़ा अवसर है। यह नया लाइसेंस हमें राज्य भर के ग्राहकों और कैप्टन के साथ बनाए गए भरोसे को और मज़बूत करने का मौका देता है, साथ ही सुविधाजनक और किफायती सेवाओं की पहुँच भी बढ़ाता है। हम खुश हैं कि हमारे कामकाज को राज्य के नए नियमों के तहत मान्यता मिली है, और हम उत्तर प्रदेश के तेज़ी से बढ़ते मोबिलिटी और डिलीवरी इकोसिस्टम में अपना योगदान बढ़ाने के लिए उत्सुक हैं।”
उन्होंने आगे कहा, “उत्तर प्रदेश में हमारी ग्रोथ के पीछे एक साधारण-सी ज़रूरत रही है – शहरों और समुदायों में रोज़मर्रा की यात्रा और डिलीवरी को ज़्यादा आसान बनाना। जैसे-जैसे हम अपनी पहुँच बढ़ा रहे हैं, हमारा ध्यान ग्राहकों को भरोसेमंद अनुभव देने और अपने कैप्टन व डिलीवरी पार्टनर्स के लिए कमाई के स्थायी मौके बनाने पर रहेगा। हम राज्य के अधिकारियों के साथ मिलकर काम करते रहेंगे और उत्तर प्रदेश मोटर व्हीकल नियम, 2026 के तहत तय किए गए मानकों का पूरी तरह पालन करेंगे।”
अपने इंटीग्रेटेड टेक्नोलॉजी प्लेटफॉर्म के ज़रिए, रैपिडो ग्राहकों को बाइक टैक्सी, ऑटो-रिक्शा, कैब और डिलीवरी सेवाएं देता है। इससे लोग एक ही इकोसिस्टम (प्लेटफॉर्म) के ज़रिए अपनी रोज़मर्रा की यात्रा और अन्य ज़रूरतें पूरी कर सकते हैं।
उत्तर प्रदेश मोटर व्हीकल (एग्रीगेटर और डिलीवरी सर्विसेज प्रोवाइडर) नियम, 2026 राज्य में काम करने वाले एग्रीगेटर और डिलीवरी सेवा प्रदाताओं को लाइसेंस देने का ढांचा प्रदान करता है। इन नियमों के तहत एग्रीगेटर से जुड़े वाहनों के साथ-साथ डिलीवरी सेवा प्रदाताओं द्वारा इस्तेमाल किए जा रहे डिलीवरी वाहन भी शामिल हैं।



