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फिक्की फ्लो उत्तराखंड ने ‘अनबाउंड एक्सप्रेशंस’ का समापन कला और स्पेसेज़ पर सार्थक संवाद के साथ किया

देहरादून । फिक्की फ्लो उत्तराखंड चैप्टर ने चेयरपर्सन तृप्ति बहल के नेतृत्व में अपने बहुचर्चित वार्षिक कला सम्मेलन ‘अनबाउंड एक्सप्रेशंस – ब्रेकिंग बैरियर्स थ्रू आर्ट’ का समापन होटल इंदरलोक में आयोजित एक विचारोत्तेजक समारोह के साथ किया। 26 अप्रैल से प्रारंभ हुई इस दस दिवसीय प्रदर्शनी में क्षेत्रभर की महिला कलाकारों और फोटोग्राफर्स ने भाग लिया। समापन अवसर पर “क्यूरेटिंग फॉर स्पेसेज़: हाउ आर्टिस्ट्स कैन कैटर टू इवॉल्विंग डिजाइन एस्थेटिक्स” विषय पर एक विशेष पैनल चर्चा आयोजित की गई। कला विविधता को प्रोत्साहित करने और सार्थक संवाद को बढ़ावा देने के उद्देश्य से आयोजित इस कला सम्मेलन में कला प्रेमियों, डिजाइनर्स, आर्किटेक्ट्स और रचनात्मक समुदाय के लोगों की उत्साहपूर्ण सहभागिता देखने को मिली। कार्यक्रम की शुरुआत फ्लो नेशनल लीड – विजुअल आर्ट्स कुँवररानी रितु सिंह के ऑनलाइन संबोधन से हुई। उन्होंने कार्यक्रम के सफल आयोजन के लिए उत्तराखंड चैप्टर को बधाई देते हुए चेयरपर्सन तृप्ति बहल एवं उनकी टीम की सराहना की। समापन समारोह की मुख्य अतिथि फिक्की फ्लो की राष्ट्रीय पूर्व अध्यक्ष, प्रख्यात लेखिका, नाटककार एवं कलाकार डॉ. कुसुम अंसल रहीं। उन्होंने अपने संबोधन में कहा कि कला सीमाओं से परे जाकर लोगों को भावनाओं, संस्कृति और जीवन अनुभवों के माध्यम से जोड़ने की क्षमता रखती है। उन्होंने इस पहल की सराहना करते हुए कहा कि यह मंच कलाकारों, डिजाइनर्स और समाज को एक साथ लाकर रचनात्मकता का उत्सव मनाने का अवसर प्रदान करता है।
पैनल चर्चा का संचालन फिक्की फ्लो उत्तराखंड की पूर्व चेयरपर्सन कोमल बत्रा ने किया। चर्चा में कला, वास्तुकला, हॉस्पिटैलिटी और डिजाइन क्षेत्र से जुड़े विशेषज्ञों ने भाग लिया। पैनल में इन जॉय लिविंग की फाउंडर क्यूरेटर निशा सहाय, सागर डिजाइन ग्रुप के प्रिंसिपल आर्किटेक्ट सागर नागपाल, ओप्युलेंस बाय आंचल की डिजाइन इंजीनियर आंचल बी पाठक तथा पिलिभीत हाउस, आईएचसीएल सेलेक्शंस, हरिद्वार के जनरल मैनेजर मयंक मित्तल शामिल रहे।
चर्चा के दौरान मयंक मित्तल ने हॉस्पिटैलिटी स्पेसेज़ में कला और सांस्कृतिक कथाओं के बढ़ते महत्व पर प्रकाश डाला। उन्होंने उत्तराखंड आने के बाद पारंपरिक ऐपण कला से प्रभावित होने का अनुभव साझा करते हुए बताया कि उन्होंने एक ऐपण कलाकार को होटल में अपनी कला प्रदर्शित करने के लिए आमंत्रित किया था। उन्होंने कहा कि मेहमानों ने इन कलाकृतियों को इतना पसंद किया कि कई लोगों ने कलाकार की पेंटिंग्स भी खरीदीं, जो स्वदेशी कला रूपों के प्रति बढ़ती रुचि को दर्शाता है। आंचल बी पाठक ने डिजाइन में भावनात्मक और संदर्भगत समझ के महत्व पर जोर देते हुए कहा कि प्रत्येक स्थान की अपनी विशिष्ट पहचान होती है और कलाकारों को उस स्थान की आत्मा से जुड़कर कार्य करना चाहिए। उन्होंने कहा कि आज डिजाइन केवल सजावट तक सीमित नहीं रह गया है, बल्कि कलाकारों, आर्किटेक्ट्स और डिजाइनर्स को सामग्रियों, टेक्सचर्स और कलात्मक तत्वों का संतुलित समावेश करते हुए अर्थपूर्ण स्पेस तैयार करने चाहिए।
निशा सहाय ने कलाकारों और डिजाइनर्स के बीच प्रारंभिक चरण से ही सहयोग की आवश्यकता पर बल दिया। उन्होंने कहा कि जब कलाकार किसी परियोजना की अवधारणा प्रक्रिया में शामिल होते हैं, तो वे उस स्थान की दृष्टि और उद्देश्य को बेहतर ढंग से समझ पाते हैं। उनके अनुसार कला केवल दृश्य आकर्षण तक सीमित नहीं होनी चाहिए, बल्कि उसे भावनात्मक जुड़ाव और अनुभव भी उत्पन्न करने चाहिए।
सागर नागपाल ने कहा कि वास्तुकला और कला अब एक-दूसरे से गहराई से जुड़ी विधाएँ बनती जा रही हैं, जो मिलकर किसी भी स्थान के चरित्र को परिभाषित करती हैं।
चर्चा के दौरान यह भी सामने आया कि आधुनिक आवासीय और व्यावसायिक स्पेसेज़ में कला की भूमिका तेजी से बढ़ रही है। पैनलिस्ट्स ने इस बात पर जोर दिया कि आज कला केवल सजावट का माध्यम नहीं, बल्कि वातावरण और अनुभव निर्मित करने का साधन बन चुकी है। कलाकारों, आर्किटेक्ट्स और डिजाइनर्स के बीच सहयोग को समय की आवश्यकता बताया गया।
चर्चा का एक प्रमुख विषय ‘पहाड़ी मॉडर्न’ डिजाइन भाषा भी रहा, जो उत्तराखंड की सांस्कृतिक और प्राकृतिक पहचान से प्रेरित है। पैनलिस्ट्स ने कहा कि यह केवल एक ट्रेंड नहीं बल्कि एक विकसित होती सौंदर्य दृष्टि है, जिसे आकार देने में कलाकारों की महत्वपूर्ण भूमिका है। कार्यक्रम में कला, डिजाइन और सतत संसाधनों के बीच संतुलन स्थापित करने पर भी विचार साझा किए गए। वक्ताओं ने प्रारंभिक संवाद, संदर्भ की समझ और स्पेस के प्रति संवेदनशीलता को आवश्यक बताया। ‘अनबाउंड एक्सप्रेशंस’ पर अपने विचार साझा करते हुए चेयरपर्सन तृप्ति बहल ने कहा कि इस पहल का उद्देश्य महिला कलाकारों और समाज के बीच संवाद एवं सहभागिता का एक जीवंत मंच तैयार करना था। उन्होंने कहा कि प्रदर्शनी को मिला उत्साहजनक प्रतिसाद रचनात्मक अभिव्यक्ति के प्रति बढ़ती रुचि को दर्शाता है तथा ऐसे मंचों की आवश्यकता को और अधिक मजबूत करता है।
इस कला सम्मेलन का उद्घाटन 26 अप्रैल को ललित कला अकादमी राष्ट्रीय पुरस्कार से सम्मानित उत्तराखंड की पहली महिला कुसुम पांडे द्वारा गेस्ट ऑफ ऑनर के रूप में किया गया था।
26 अप्रैल से 6 मई तक दर्शकों के लिए खुली रही इस प्रदर्शनी में मीना गर्ग, मेघना प्रेम, मान्या अग्रवाल, जिगिषा प्रियदर्शिनी, जुही शर्मा, माधवी ठाकुर, राखी गुप्ता, स्मृति लाल, रीना अग्रवाल, स्नेहा तोमर, मनीत सूरी, अंजलि थापा, बिंदु छाबड़ा, डॉ. मनीषा बाजपेयी, उमा अग्निहोत्री, बबीता शर्मा, मंजू कला और वेणु ढींगरा सहित अनेक महिला कलाकारों की कलाकृतियाँ प्रदर्शित की गईं। सम्मेलन के दौरान कलाकार राखी एवं अनुज द्वारा आयोजित ऐपण आर्ट वर्कशॉप तथा मोही कपूर द्वारा आयोजित गोंड आर्ट वर्कशॉप ने कार्यक्रम को एक विशेष सांस्कृतिक आयाम प्रदान किया। इन कार्यशालाओं में स्वयं सहायता समूह से जुड़ी महिलाओं ने उत्साहपूर्वक भाग लिया, जिससे लोक कला रूपों को बढ़ावा मिलने के साथ स्थानीय कलाकारों को भी प्रोत्साहन मिला। कार्यक्रम का समन्वय फ्लो उत्तराखंड विजुअल आर्ट्स लीड एवं तान्शी आर्ट्स स्टूडियो की संस्थापक स्मृति लाल ने किया, जबकि फोटोग्राफी सेक्शन का समन्वय फोटोग्राफर भूमेश भारती द्वारा किया गया।
इस अवसर पर पूर्व चेयरपर्सन कोमल बत्रा, डॉ. नेहा शर्मा (नेशनल गवर्निंग बॉडी सदस्य) एवं डॉ. गीता खन्ना, सीनियर वाइस चेयरपर्सन मीनाक्षी सोती, वाइस चेयरपर्सन स्मृति बत्ता, सचिव हरप्रीत कौर मरवाह, कोषाध्यक्ष मनीत सूरी, फ्लो सदस्य, सहभागी कलाकार तथा शहर के रचनात्मक एवं व्यावसायिक समुदाय से जुड़े गणमान्य अतिथि उपस्थित रहे।

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