
• एमेज़ॉन ने साल 2022 के बाद अब तक इस प्रोग्राम के लिए 50 करोड़ रुपये (लगभग 6 मिलियन अमेरिकी डॉलर) का निवेश किया है। कंप्यूटर साईंस में शिक्षा के ये अभियान 50,000 से अधिक सरकारी स्कूलों के 4.8 मिलियन विद्यार्थियों तक पहुँचे।
• साल 2025 में ग्रेजुएट होने वाले पहले बैच को एमेज़ॉन एवं अन्य अग्रणी कंपनियों में 89 प्रतिशत प्लेसमेंट मिले।
नई दिल्ली : आज एमेज़ॉन ने भारत में अपने एमेज़ॉन फ्यूचर इंजीनियर (ए.एफ.ई) प्रोग्राम के अंतर्गत साल 2026 के लिए 500 नई स्कॉलरशिप्स की घोषणा की, जिनका उपयोग कम आय वाले परिवारों की इंजीनियरिंग छात्राओं को वित्तीय मदद, मेंटरशिप और टेक्नोलॉजी में करियर के अवसर उपलब्ध कराने के लिए किया जाएगा। एमेज़ॉन फ्यूचर इंजीनियर (ए.एफ.ई) एमेज़ॉन का ग्लोबल कंप्यूटर साईंस एजुकेशन प्रोग्राम है, जो टेक्नोलॉजी की शिक्षा व करियर के अवसर प्रदान करने के लिए शुरू किया गया है। इन नई स्कॉलरशिप्स के साथ इस प्रोग्राम का लाभ कुल 2,000 स्कॉलर्स को मिलने लगा है।
ए.एफ.ई स्कॉलरशिप द्वारा कंप्यूटर साईंस या उससे जुड़ी शाखाओं में बी.ई या बी.टेक कर रही कम आय वर्ग वाले परिवारों की छात्राओं को 2 लाख रुपये का वित्तीय सहयोग दिया जाता है। इस वित्तीय सहयोग के अलावा, स्कॉलर्स को लैपटॉप, बूटकैंप्स द्वारा टेक्निकल ट्रेनिंग, एमेज़ॉन वीमेन ऑफ द वर्ल्ड (डब्लू.ओ.डब्लू) के वेबिनार, एमेज़ॉन इंजीनियरों द्वारा वन-टू-वन मेंटरिंग, और सैकंड ईयर पूरा होने के बाद एमेज़ॉन में आठ हफ्ते की पेड इंटर्नशिप भी प्राप्त होती है।
कैंडी कैसलबेरी, वाईस प्रेसिडेंट, एमेज़ॉन एक्सपीरिएंसेज़ एंड अपस्किलिंग ने कहा, ‘‘हर विद्यार्थी को अपनी क्षमता को खोजने का अवसर मिलना चाहिए। एमेज़ॉन फ्यूचर इंजीनियर स्कॉलरशिप के माध्यम से हम ऐसे लीडर्स में निवेश कर रहे हैं, जो काम का भविष्य तय करेंगे। ये भारत के समाज में मौजूद प्रतिभाशाली और पक्के इरादे वाले वाले विद्यार्थी हैं। 2026 की स्कॉलरशिप प्राप्त करने वाली छात्राएं प्रदर्शित करती हैं कि जब अपस्किलिंग के मौके मिलते हैं और युवाओं एवं उनके सपनों के बीच की बाधाएं दूर होती हैं, तो वो मिलकर क्या संभव कर सकती हैं।’’
टूगैदर इंडिया समिट के अवसर पर घोषित ये स्कॉलरशिप टेक्नोलॉजी में करियर बनाने के लिए सीखने के अवसर उपलब्ध कराने की एमेज़ॉन की प्रतिबद्धता प्रदर्शित करती हैं। इससे हमें फ्यूचर-रेडी बनने में मदद मिलेगी। इस समिट के अंतर्गत, टूगैदर एट एमेज़ॉन एक ऐसी पहल है, जो कर्मचारियों को कौशल विकास, वर्कप्लेस सपोर्ट एवं सामुदायिक सहभागिता के साथ विकास करने, आगे बढ़ने और कनेक्ट होने में समर्थ बनाती है। इसके साथ ही, इन दिस टूगैदर अभियान विद्यार्थियों, ग्राहकों, समुदायों, पार्टनर्स और बिज़नेस मालिकों को एमेज़ॉन के साथ अवसर खोजने में मदद करता है।
पहले ग्रेजुएट बैच को 89 प्रतिशत प्लेसमेंट मिला
यह प्रोग्राम साल 2022 में 200 स्कॉलर्स के साथ शुरू किया गया था, जो साल-दर-साल तेजी से बढ़ते हुए साल 2023 से 500 वार्षिक स्कॉलरशिप्स तक पहुँच गया। स्कॉलर्स का चयन एक कठोर प्रक्रिया द्वारा किया जाता है, जिसमें उनकी एकेडेमिक मेरिट, वित्तीय जरूरत, और लीडरशिप की क्षमता का मूल्यांकन होता है। साल 2025 में इस प्रोग्राम के ग्रेजुएट होने वाले पहले बैच को 89 प्रतिशत प्लेसमेंट मिला। ग्रेजुएट्स ने एमेज़ॉन के साथ फॉर्च्यून 500 कंपनियों में नियुक्ति पाई। आज तक, लगभग 400 स्कॉलर एमेज़ॉन में विभिन्न टेक्निकल पदों पर इंटर्नशिप पूरी कर चुके हैं। आने वाले महीनों में नए बैच के सैकड़ों अन्य स्कॉलर इंटर्नशिप के लिए तैयार हैं।
इनमें से कई स्कॉलर टियर 2 और टियर 3 शहरों से पहली पीढ़ी के कॉलेज ग्रेजुएट हैं, जिससे भारत के वंचित क्षेत्रों तक इस प्रोग्राम की पहुँच प्रदर्शित होती है। तेलंगाना की श्रेया मुला अब एक सॉफ्टवेयर डेवलपमेंट इंजीनियर हैं। आंध्र प्रदेश की कीर्ति शंकर क्लाउड सपोर्ट एसोसिएट हैं। वहीं नागपुर, महाराष्ट्र की अंजलि अष्टके डायश बैंक में ग्रेजुएट एनालिस्ट हैं। ऐसी ही अनेकों ग्रेजुएट छात्राओं ने टेक्नोलॉजी के क्षेत्र में अपना करियर बनाया है, जिससे दीर्घकालिक अवसर प्रदान करने की इस प्रोग्राम की क्षमता प्रदर्शित होती है।
सरकारी स्कूलों के 4.8 मिलियन स्टूडेंट्स तक पहुँच
एमेज़ॉन ने साल 2022 से अब तक ए.एफ.ई प्रोग्राम के लिए 50 करोड़ रुपये (लगभग 6 मिलियन अमेरिकी डॉलर) का निवेश किया है, जिससे छात्राओं को टेक्नोलॉजी के क्षेत्र में करियर बनाने के लिए स्कॉलरशिप पाने का संरचनाबद्ध अवसर मिला है। यह स्कॉलरशिप प्रोग्राम फाउंडेशन फॉर एक्सीलेंस के साथ साझेदारी में चलाया जा रहा है। नवगुरुकुल स्कॉलर्स को उद्योग के लिए जरूरी कौशल प्रदान करने तथा इंटर्नशिप के लिए तैयार करने के लिए टेक्निकल प्रशिक्षण प्रदान करता है।
यह प्रोग्राम इंजीनियरिंग स्कॉलरशिप्स के अलावा साल 2021 से साल 2025 के बीच कंप्यूटर साईंस एवं ए.आई की शिक्षा प्रदान करने के लिए भारत के 50,000 से अधिक सरकारी स्कूलों के 4.8 मिलियन स्टूडेंट्स तक पहुँच चुका है।



