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जिलाधिकारी के निर्देश पर आवासीय भवनों की सीलिंग- ध्वस्तीकरण प्रक्रिया में पारदर्शिता सुनिश्चित, पूर्व अनुमति के बिना कार्रवाई पर रोक

चमोली । जिलाधिकारी एवं उपाध्यक्ष, जिला स्तरीय विकास प्राधिकरण, चमोली श्री गौरव कुमार ने आवासीय भवनों के विरुद्ध सीलिंग एवं ध्वस्तीकरण की कार्रवाई को लेकर महत्वपूर्ण निर्देश जारी किए हैं। उन्होंने स्पष्ट किया है कि उत्तराखण्ड नगर एवं ग्राम नियोजन तथा विकास अधिनियम, 1973 की सुसंगत धाराओं के अंतर्गत किसी भी आवासीय भवन के विरुद्ध सीलिंग अथवा ध्वस्तीकरण की कार्रवाई जिलाधिकारी एवं प्राधिकरण के उपाध्यक्ष की पूर्व अनुमति के बिना नहीं की जाएगी। जारी आदेश के अनुसार, विकास प्राधिकरण द्वारा जनपद में बिना पूर्व अनुमति के जिन आवासीय भवनों को सील किया गया है, उन्हें तत्काल प्रभाव से डी-सील किया जाएगा तथा ऐसी कार्रवाई को तत्काल प्रभाव से समाप्त किया जाएगा।

जिलाधिकारी ने निर्देशित किया कि भविष्य में किसी भी आवासीय भवन को बिना स्पष्ट वैधानिक आधार, विधिक परीक्षण तथा सक्षम प्राधिकारी की पूर्व अनुमति के सील नहीं किया जाएगा। यदि किसी भवन के विरुद्ध गंभीर नियम उल्लंघन के कारण कार्रवाई आवश्यक हो, तो अधिनियम की धारा 27 एवं 28 के अंतर्गत निर्धारित समस्त कानूनी प्रक्रियाओं का शत-प्रतिशत अनुपालन सुनिश्चित किया जाएगा। इसमें कारण बताओ नोटिस जारी करना, संबंधित पक्ष को निर्धारित समयावधि में अपना पक्ष रखने का अवसर देना तथा सुनवाई की प्रक्रिया पूरी करना अनिवार्य होगा।
उन्होंने कहा कि किसी भी प्रशासनिक कार्रवाई के दौरान आम नागरिकों को अनावश्यक असुविधा, उत्पीड़न या मानसिक एवं व्यावसायिक परेशानी का सामना न करना पड़े। सभी कार्रवाइयां पूर्णतः पारदर्शी, न्यायसंगत एवं विधिसम्मत तरीके से की जाएं।

जिलाधिकारी ने सभी संबंधित अधिकारियों को निर्देश दिए हैं कि इन आदेशों का कड़ाई से पालन सुनिश्चित करें। साथ ही चेतावनी दी कि भविष्य में किसी भी प्रकार की प्रक्रियात्मक त्रुटि, विधिक शिथिलता अथवा मनमानी पाए जाने पर संबंधित अधिकारी एवं कर्मचारी की व्यक्तिगत जिम्मेदारी तय करते हुए उनके विरुद्ध कड़ी अनुशासनात्मक एवं दंडात्मक कार्रवाई की जाएगी।

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