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मशहूर अदाकारा अनिता हसनंदानी बनीं ज़ी टीवी के शो ‘छोरियाँ चली गाँव’ की विनर

नई दिल्ली। दो महीने तक हंसी, जज़्बातों और ज़बर्दस्त जज़्बे से भरी भारत के गांव की सच्ची तस्वीर दिखाने के बाद, ज़ी टीवी के नए और अनोखे रियलिटी शो ‘छोरियाँ चली गाँव’ ने इस वीकेंड अपना शानदार ग्रैंड फिनाले देखा। ढोल-ताशों की गूंज और गांव की उत्साह भरी रंगत के बीच मशहूर अदाकारा अनिता हसनंदानी को विनर घोषित किया गया। अनिता ने ट्रॉफी उठाकर शो के पहले सीज़न को एक यादगार अंदाज़ में पूरा किया।
रणविजय सिंघा द्वारा होस्ट किए गए इस सीज़न ने गांव की असली खूबसूरती और सादगी को बेहद दिलचस्प ढंग से पेश किया। शो में सेलेब्रिटीज़ को उनके हौसले और सब्र की कसौटी पर परखा गया। कभी गाय दुहनी पड़ी, कभी कुएं से पानी भरना, कभी चूल्हे पर खाना बनाना, तो कभी गांववालों से रिश्ते जोड़ना – इन सबके बीच अनिता ने अपनेपन और सादगी से न सिर्फ बाकी प्रतिभागियों बल्कि गांववालों और दर्शकों का भी दिल जीत लिया।
फिनाले नाइट पूरी तरह से एक एंटरटेनमेंट का पैकेज रही, जहां धमाकेदार परफॉर्मेंस और दिल छू लेने वाले एक्ट्स ने दर्शकों को बांधे रखा। टॉप 5 फाइनलिस्ट्स ने शो की शुरुआत एक जोशीली परफॉर्मेंस से की। इंटरनेट पर्सनैलिटी उर्फी (डॉली की बहन) और कृष्णा श्रॉफ के बॉयफ्रेंड अज़ीम ने भी अपनी मौजूदगी से रात का मज़ा और बढ़ाया। इतना ही नहीं, छोरियों ने गांव के उन परिवारों का आभार जताने के लिए बड़ा दिल दिखाया, जिन्होंने उन्हें अपनाया। डॉली जावेद ने किरण और उनकी मां को 60,000 रुपए और सिलाई मशीन भेंट की, सुरभि मेहरा ने नमन नैतिक की पढ़ाई का ज़िम्मा तीसरी कक्षा से विनायक स्कूल में उठाया, अनिता हसनंदानी ने शगुना बाई के पोते की पूरी शिक्षा की जिम्मेदारी ली, एरिका पैकर्ड ने किरण राठौड़ के बेटे की दो साल की पढ़ाई स्पॉन्सर की और कृष्णा श्रॉफ ने मनीष को खेती के लिए 1 लाख रुपए की मदद दी। यह नज़ारा शो की असली भावना यानी गांव को लौटाने की भावना को बखूबी दर्शाता है।
अपनी जीत पर अनिता हसनंदानी ने कहा, “जब मैंने ‘छोरियाँ चली गाँव’ का हिस्सा बनने के लिए हामी भरी थी, तब मुझे पता था कि यह मुझे मेरी कम्फर्ट ज़ोन से बहुत बाहर ले जाएगा। लेकिन मैंने यह नहीं सोचा था कि यह सफर मुझे इतना बदल देगा। पहले दिन से ही मैंने खुद से कहा था कि मुझे यह जीत आरव्व और रोहित के लिए चाहिए। वो मेरे सबसे बड़े मोटिवेशन रहे। जब-जब मुझे मुश्किल हुई या घर की याद आई, मैंने उन्हीं को सोचकर खुद को और आगे बढ़ाया। आज जब मैं यह ट्रॉफी हाथ में ले रही हूं, तो यह सिर्फ मेरी नहीं, हमारी फैमिली की जीत है। यह सफर सच्चा, इमोशनल, बहुत-सी सीख देने वाला और यादगार रहा, जो हमेशा मेरी यादों में बसा रहेगा।”
शो के होस्ट रणविजय सिंघा ने कहा, “‘छोरियाँ चली गाँव’ को होस्ट करना मेरे लिए बेहद खास रहा, क्योंकि यह मुझे मेरे गांव के दिनों की याद दिलाता रहा, जिनसे मैं हमेशा जुड़ा रहा हूं। इन शानदार छोरियों को शहर की ज़िंदगी छोड़कर इतनी ईमानदारी से गांव की सादगी को अपनाते देखना बहुत प्रेरणादायक रहा। अनिता ने अपने सब्र और सौम्यता से सबका दिल जीता और उन्हें ट्रॉफी उठाते देखना इस सफर का परफेक्ट एंडिंग था। मेरे लिए हर प्रतिभागी एक विनर है क्योंकि हर किसी ने खुद के भीतर वो ताकत और खुशी ढूंढी जो अक्सर हमारी तेज़ रफ्तार ज़िंदगी में कहीं खो जाती है। सभी छोरियों के आने वाले सफर के लिए मेरी ढेर सारी शुभकामनाएं।”
फिनाले नाइट ने 60 दिनों की दोस्ती, जज़्बे, संस्कृति को करीब से देखने का मौका दिया और हंसी-खुशी के पलों को शानदार अंदाज़ में समेटा। अनिता हसनंदानी, कृष्णा श्रॉफ, ऐश्वर्या खरे, सुमुखी सुरेश, अंजूम फाकीह, रमीत संधू, रेहा सुखेजा, एरिका पैकर्ड, सुरभि मेहरा, समृद्धि मेहरा, डॉली जावेद और वाइल्ड कार्ड एंट्री मायरा मिश्रा – सभी ने अपने-अपने शहर वाले अंदाज़ को छोड़कर गांव की ज़िंदगी को दिल से अपनाया।
हर प्रतिभागी की अपनी अनोखी यात्रा रही, लेकिन अनिता हसनंदानी ने अपने सब्र, आत्मविश्वास और सच्चाई से ट्रॉफी अपने नाम की। यह एक शानदार अंत रहा उस सीज़न का, जिसने साहस, दोस्ती और अपनी जड़ों की ओर लौटने की खुशी का जश्न मनाया।
‘छोरियाँ चली गाँव’ का पहला सीज़न भले ही पूरा हो गया हो, लेकिन ज़ी टीवी पर ऐसे ही और भी दिलचस्प और प्रेरणादायक शो आपको हर दिन मनोरंजन करते रहेंगे।

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