DehradunUttarakhand

मसूरी के झड़ीपानी में भूमि को लेकर विवाद

  • रेलवे ने अतिक्रमण कहकर थमाया नोटिस, स्थानीय लोगों में आक्रोश
  • रेलवे विभाग ने मसूरी में झड़ीपानी भूमि के निवासियों को नोटिस जारी किया है। रेलवे ने अतिक्रमण बताया है।

मसूरी । उत्तर रेलवे द्वारा ओक ग्रोव स्कूल, झड़ीपानी, मसूरी क्षेत्र में रेलवे भूमि पर अतिक्रमण को लेकर जारी नोटिस के बाद अब मामला तूल पकड़ता जा रहा है। एक ओर रेलवे प्रशासन द्वारा मसूरी झड़ीपानी स्थित रेलवे की भूमि पर अनाधिकृत कब्जे का दावा करते हुए जल्द भूमि खाली करने का अल्टीमेटम दिया है, वहीं दूसरी ओर स्थानीय लोगों ने इसका विरोध शुरू कर दिया है।
रेलवे प्रशासन के अनुसार कुछ लोगों द्वारा रेलवे भूमि पर कब्जा किया गया है। इस संबंध में पूर्व में भी नोटिस देकर भूमि खाली करने के निर्देश दिए गए थे। लेकिन अब तक अतिक्रमण नहीं हटाया गया। रेलवे ने स्पष्ट चेतावनी दी है कि संबंधित पक्ष जल्द भूमि खाली करें नहीं तो उनके खिलाफ पब्लिक प्रेमिसेस एक्ट, 1971 के अंतर्गत विधिक कार्रवाई की जाएगी।
मौके पर मौजूद देहरादून रेलवे कार्यालय में कार्यरत एसएस रावत का कहना है कि, अगर तय समय सीमा में अतिक्रमण नहीं हटाया गया तो विधिक कार्रवाई शुरू की जाएगी। कब्जा हटाने की प्रक्रिया बलपूर्वक कराई जा सकती है और पूरी कार्रवाई में होने वाला खर्च संबंधित व्यक्ति से वसूला जाएगा। मामले की गंभीरता को देखते हुए रेलवे प्रशासन ने राजस्व विभाग और स्थानीय प्रशासन के साथ संयुक्त निरीक्षण और सीमांकन कराने की भी तैयारी कर ली है। ताकि भूमि की वास्तविक स्थिति स्पष्ट की जा सके। रेलवे अधिकारियों ने दो टूक कहा है कि सार्वजनिक संपत्ति पर किसी भी प्रकार का अतिक्रमण बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। उत्तर रेलवे ने संकेत दिए हैं कि भविष्य में भी ऐसे मामलों में सख्त कार्रवाई जारी रहेगी।
उधर, नोटिस मिलने के बाद स्थानीय लोगों ने रेलवे प्रशासन की कार्रवाई पर सवाल उठाए हैं। उनका कहना है कि उनके पास काफी पुरानी वैध रजिस्ट्री मौजूद है और क्षेत्र का सीमांकन पूर्व में ही किया जा चुका है। विरोध कर रहे लोगों का आरोप है कि रेलवे अधिकारी बिना पर्याप्त सबूतों के नोटिस जारी कर रहे हैं और बेवजह परेशान करने की कोशिश की जा रही है। उनका कहना है कि यदि बिना ठोस प्रमाण के कार्रवाई या प्रचार किया गया, तो वे इसका खुलकर विरोध करेंगे।
स्थानीय स्तर पर यह मामला अब चर्चा का विषय बन गया है। एक तरफ रेलवे प्रशासन सार्वजनिक संपत्ति की सुरक्षा का हवाला दे रहा है, तो दूसरी ओर प्रभावित पक्ष अपने दस्तावेजों के आधार पर कार्रवाई को अनुचित बता रहा है। अब देखना होगा कि संयुक्त सीमांकन या प्रशासनिक स्तर पर होने वाली आगे की प्रक्रिया इस विवाद को सुलझा पाती है या मामला और आगे बढ़ता है।

Related Articles

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Back to top button